हिंदुत्व नहीं ‘ममता’ की प्यासी बंगाल, दीदी की बंगाल की जीत के बाद दिल्ली के लिए रास्ता साफ

mamata banerjee

By- Firoz Iliyasi

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West bengal election result 2021) में टीएमसी ने दोहरा शतक लगाते हुए जबरदस्त सरकार में वापसी की है. 213 सीट जीत कर ममता बनर्जी (mamata banerjee) बंगाल के किले को फतह कर लिया है. पीएम मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही बीजेपी सिर्फ 77 सीट ही जीत पाई. वहीं बंगाल से लेफ्ट और कांग्रेस का सुफरा साफ हो गया है. ममता बनर्जी की इस जीत ने पश्चिम बंगाल (West Bengal Election Result 2021) की राजनीति को राष्ट्रीय पटल पर ला कर रख दिया है. भले ही ममता बनर्जी (mamata banerjee) अपनी सीट नंदीग्राम हार गई हों लेकिन इस चुनाव के बाद देश में उनका कद बहुत बड़ा कर दिया है. अब तीसरी बार ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं. इस जीत के साथ ही चुनावी गलियारों में ये चर्चा शुरू हो गई है कि क्या 2024 में लोकसभा के चुनाव में विपक्ष का एक बड़ा चेहरा ममता बनर्जी के रूप में मिल गया है ?

बीजेपी की पूरी लश्कर के सामने थी बस एक महिला

जिस तरह से पश्चिम बंगाल के चुनाव (West bengal election result 2021) में एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा केंद्रीय मंत्रियों का टीम, चाणक्य अमित शाह के साथ पूरी एक फौज उतरी थी. ऐसी तस्वीर बनाई गई थी कि ममता बनर्जी (mamata banerjee) का सत्ता में लौटना अब मुश्किल हो जाएगा. 10 साल के anti-incumbency यानी विरोधी लहर को बीजेपी ने मुद्दा बनाया और प्रधानमंत्री ने खुद करीब 20 रैलियां कर डाली. दूसरी तरफ बंगाल की जमीन से जुड़े मुद्दे, बंगाली अस्मिता को लेकर एक महिला ममता बनर्जी खड़ी रही. दोनों तरफ से बयानों के तीर जबरदस्त चले. लेकिन जीत आखिर में ममता बनर्जी की हुई. बीजेपी ने अपने मूल मुद्दा हिंदुत्व से लेकर घुसपैठिया जैसे तमाम दाव खेले. लेकिन बंगाल की जनता ने बीजेपी के हिंदुत्व के आगे बंगाल अस्मिता को तरजीह दी. और प्रधानमंत्री मोदी के आगे ममता बनर्जी को अपना नेता चुना.

बीजेपी का हिंदुत्व बनाम बंगाली अस्मिता

TMC की इस जीत (West Bengal Election Result 2021) ने पीछले सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले. ममता बनर्जी (Mamata banerjee) ने बीजेपी को उसके हर दाव का जवाब उसी के अंदाज में दिया. हिंदुत्व का नारा के आदे उन्होंने चंडी का पाठ पढ़ा. बाहरी घुसपैठिया पर उन्होंने बंगाली अस्मिता का दाव खेला. व्हील चेयर पर बैठकर एक घायल महिला ने चुनाव के दंगल में विरोधियों को धूल चटा दी. भले ही ममता बनर्जी के पास चुनाव में उनके अलावा कोई स्टार प्रचारक नहीं था. लेकिन ममता अकेले बीजेपी की पूरी सेना पर भारी पड़ी. इस चुनावी दंगल में भले ही ममता के अपने एक के बाद एक छोड़कर विरोधी खेमे में चले गए. लेकिन ममता बनर्जी का साथ बंगाल की जनता ने दिया. टीएमसी को करीब 48 प्रतिशत वोट मिले. जिसने दिखा दिया कि बंगाल की अवाम किस तरह अपनी दीदी को चाहता है.

‘दीदी वो दीदी’ के जवाब में ‘खेला होबे’

पश्चिम बंगाल चुनाव (West bengal election result 2021) में बीजेपी ने हर वो दाव खेला जिसमें वो माहिर है. और नरेंद्र मोदी जब चुनाव के मैदान में खेलते हैं तो पूरे फॉर्म के साथ खेलते हैं. ‘दीदी वो दीदी’ का नारा जब पीएम मोदी ने चुनावी रैलियों के मंच से लगाया तो खूब ताली बटोरी. वो मीडिया से लेकर पूरे देश में छा गए. पीएम मोदी का ये दाव ऐसा लग रहा है था जैसे टीएमसी और ममता बनर्जी पर भारी पर जाएगा. लेकिन ममता बनर्जी (mamata banerjee) भी जमीन से जुड़ी नेता रही हैं. विरोधियों का जवाब उन्हें देना बाखूबी आता है. उन्होंने तुरंत पलटवार करते हुए ‘खेला होबे’ का नारा दिया. जो पश्चिम बंगाल के दिल में जा उतरा. बंगाली में दिया गया ये नारा टीएमसी के लिए काम कर गया. भले ही पीएम मोदी ‘दीदी वो दीदी’ के नारे से सुर्खियां बटोर रहे थे, तालियां बटोर रहे थे. लेकिन ‘खेला होबे’ ने एक बंगाली को अपनी अस्मिता और मिट्टी की इतिहास के पन्नों में दर्ज सुनहरे अक्षर याद दिला गया. और जब 2 मई को चुनाव के नतीजे आए तो सभी ने एक सुर में कहा बीजेपी के साथ खेला हो गया.

हिंसा के बीच इमोशनल कार्ड

पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान जिस तरह से हिंसा हो रही थी इसके सभी गवाह हैं. टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा की खबरे आम हो रही थी. इसी बीच ममता बनर्जी (mamata banerjee) पर कथित हमला हुआ. वीडियो सामने आया जिसमें उनकी एक पैर में चोट आ गई. इस घटना के बाद बीजेपी ने इसे सियासी ड्रामा बताया. लेकिन ममता बनर्जी ने इसे ही अपना हथियार बनाया. और व्हील चेयर पर ही वो रैलियां और जनसभाएं करती नजर आईं. जहां एक तरफ बीजेपी इसे ममता का इमोशनल कार्ड बता रही थी. गृहमंत्री अमित शाह ने एक रैली में ये तक कह डाला की ममता बनर्जी के लिए प्रार्थना करता हूं कि जल्द से जल्द उनका पैर ठीक हो जाए ताकि वो 2 मई को अपने दोनों पैरों पर चलकर राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने जाएं. तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी इसी एक टांग की बदौलत जनता के बीच जाकर बंगाल की राजनीति से निकल कर दिल्ली की राजनीति में उतड़ने का एलान कर दिया.

क्या दिल्ली की राजनीति में ममता बनेंगी विपक्ष का चेहरा ?

पश्चिम बंगाल चुनाव के साथ पांच राज्य में जिस तरह से कांग्रेस की दुर्दशा हुई है. उसपर कई सवाल उठने लगे हैं. सवाल ये है कि क्या पश्चिम बंगाल में तीसरी बार प्रचंड जीत के साथ ममता बनर्जी नरेंद्र मोदी की ही तरह 2014 में विपक्ष का एक बड़ा चेहरा बनने जा रही हैं. रानीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस की गिरती साख के बीच ममता बनर्जी (mamata banerjee) देश में मजबूत विपक्ष का चेहरा बन सकती हैं. 2024 में वो विपक्ष को एक मंच पर लाकर प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बन जाए तो कोई ताज्जुब की बात नहीं होगी. पश्चिम बंगाल में भले ही लेफ्ट आउट हो गई है लेकिन केरल में उसने सत्ता में वापसी की है. ऐसे में दिल्ली की राजनीति में ममता बनर्जी को क्या लेफ्ट समर्थन करेगी ? इस सवाल के जवाब में फिलहाल यही कहा जा सकता है कि केंद्र की राजनीति राज्य से अलग होती है. क्योंकि बीजेपी सभी पार्टियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. ऐसे में यूपी चुनाव से पहले ममता बनर्जी से बड़ा चेहरा विपक्ष के पास फिलहाल नहीं. ऐसे में केंद्र की राजनीति में बीजेपी के विरोधी ममता के समर्थन में जरूर खड़े दिखाई दे सकते हैं. फिलहाल ये क्यासों का दौर है. ममता बनर्जी ने जीत के बाद ये साफ कर दिया है कि वो फिलहाल कोरोना संक्रमण पर ध्यान दे रही हैं. इसके बाद ही वो आगे की रणनीति को तय करेंगी. इतनी बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री शपथ समारोह भी बिल्कुल छोटे पैमाने पर किया जाएगा. यकीनन कहा जा सकता है कि ममता बनर्जी का कद इस जीत के साथ ही देश में काफी बड़ा हुआ है.

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