शीतलहरी के बीच भाजपा-जदयू टकराव से चढ़ा बिहार का राजनीतिक पारा

Amid cold wave political temperature of Bihar soars with Sanjay Jayswal FB post. ( Collage of file photo of Sanjay Jayaswal, Upendra Kushwaha and Lallan Singh)

Amid cold wave political temperature of Bihar soars with Sanjay Jayswal FB post. ( Collage of file photo of Sanjay Jayaswal, Upendra Kushwaha and Lallan Singh)

सोमवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल के फेसबुक पोस्ट ने बिहार में जारी शीतलहरी के बीच राजनीतिक पारा चढ़ा दिया। जायसवाल ने जदयू नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्राट-अशोक विवाद में घसीटे जाने पर तीखी प्रतिकिया दी। उन्होंने जदयू नेताओं को चेतावनी देते हुए लिखा की ‘अगर ट्विटर पर प्रधानमंत्री को टैग करना जारी रहा तो भाजपा के 76 लाख कार्यकर्त्ता जवाब देना जानते हैं’।

उल्लेखनीय है की पद्मा श्री और साहित्य अकादमी पदकों से सम्मानित दया प्रकाश सिन्हा द्वारा बिहार का गौरव कहे जाने वाले सम्राट अशोक की तुलना मुग़ल शासक औरंगज़ेब से करने के बाद बिहार NDA नेताओं के बीच तीखी नोक झोंक का सिलसिला शुरू हो गया था। नवभारत टाइम्स को दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए दया सिन्हा ने कहा था, “जब मैं सम्राट अशोक पर नाटक लिख रहा था तो रिसर्च के बाद बहुत ही आश्चर्य हुआ कि अशोक और मुगल बादशाह औरंगजेब के चरित्र में बहुत समानता दिखाई दी। दोनों ने अपने प्रारंभिक जीवन में बहुत पाप किए थे और अपने पाप को छिपाने के लिए अतिधार्मिकता का सहारा लिया ताकि जनता का ध्यान धर्म के प्रति प्रेरित हो जाए और उनके पाप पर किसी का ध्यान न जाए। दोनों ने अपने भाई की हत्या की थी और अपने पिता को कारावास में डाल दिया था। अशोक का चरित्र बहुत ही रोचक है। उसने अपनी पत्नी को जला दिया था, क्योंकि उसने एक बौद्ध भिक्षु का अपमान किया था।”

दया प्रकाश सिन्हा के बीजेपी के साहित्य सेल से जुड़े होने के कारण जदयू नेता लगातार हमलावर हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और संसदीय बोर्ड के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा सहित कई जदयू नेता दया सिन्हा से सम्मान वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं। जदयू नेता इसे बिहारी अस्मिता पर हमला बता रहे और इसके लिए भाजपा को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं । इस क्रम में प्रधानमंत्री को ट्वीटर पर टैग किया जा रहा है।

हालाँकि दया प्रकाश ने सफाई दी है की उनका अब बीजेपी से कोई नाता नहीं है। साथ ही वह यह कह रहे हैं की उन्होंने सम्राट अशोक और औरंगज़ेब की कोई तुलना नहीं की है। लेकिन रोचक बात यह है की विकिपीडिया उन्हें अभी भी भाजपा साहित्य सेल का राष्ट्रीय कन्वेनर बता रहा ।

संजय जायसवाल ने अपने पोस्ट में लिखा, “NDA को मज़बूत रखने के लिए मर्यादा का पालन करने की ज़िम्मेदारी सबकी है यह एक तरफा नहीं हो सकता। इस क्रम में पहला कदम प्रधानमंत्री के साथ ट्वीटर -ट्वीटर खेलना बंद करना है क्यूंकि प्रधानमंत्री सभी भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के गौरव हैं……..” उन्होंने आगे लिखा की सम्मान वापसी राष्ट्पति का प्राधिकार है इसके लिए प्रधानमंत्री से मांग करना कहाँ तक उचित है।

ज़ाहिर है बिहार भाजपा दया सिन्हा के विचारों से असहज महसूस कर रही है और खुद को इससे अलग करने की पूरी कोशिश कर रही है इसलिए बिहार भाजपा के नेता भी दया सिन्हा की आलोचना करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। संजय जायसवाल ने तो सिन्हा के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कराई है।

इस बीच उपेंद्र कुशवाहा ने संजय जायसवाल को खुली चिट्ठी लिखकर जवाब दिया है। जहां उन्होंने गठबन्धन धर्म पर जायसवाल की बातों से सहमति जताई लेकिन साथ ही साफ कर दिया की सम्राट अशोक के मुद्दे पर हम आपसे सहमत नहीं हो सकते हैं। कुशवाहा ने इस मामले में जायसवाल के पूरे वक्तवव्य को गोल मटोल और भटकाव पैदा करने वाला करार दिया। उन्होंने डॉ जायसवाल से पूछा की क्या आप दया प्रकाश सिन्हा द्वारा घोर व अमर्यादित भाषा में सम्राट अशोक की औरंगज़ेब से की गयी तुलना को इतिहास में छेड़छाड़ मानते हैं या नहीं।

2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू की 43 सीटों के मुकाबले 74 सीटें जीतने के बावजूद नितीश कुमार को मुख़्यमंत्री बनाने वाली भाजपा इस बार पहले की तुलना में काफी आक्रमक रुख में है और किसी भी आलोचना का मुखरता से जवाब देने यहाँ तक की नितीश कुमार को निशाने पर लेने में भी कोई संकोच नहीं करती। लेकिन जदयू के दो बड़े नेताओं ने भाजपा के विरुद्ध जिस तरह मोर्चा खोल रखा है उसे लेकर राजनितिक गलियारों में हैरानी है।

हालाँकि ज़्यादातर विश्लेषकों का मानना है की फ़िलहाल जारी सघन वाक् युद्ध के बावजूद भाजपा और जदयू की परस्पर निर्भरता के कारण गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ने वाला।

(शम्स खान पटना स्थित राजनितिक विश्लेषक हैं, यह लेखक के निजी विचार हैं)

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